पुणे में मीडिया संवाद के दौरान मेक इन इंडिया, नए वैश्विक क्षमता केंद्र और खाड़ी देशों में कंपनी की पहुंच को एक साथ रखा गया
पुणे, २८ अक्टूबर २०२६: साउथको के अध्यक्ष थॉमस मेहलर ने पुणे के विमान नगर स्थित कंपनी कार्यालय में पत्रकारों से मुलाकात की और कंपनी के वैश्विक नेटवर्क में भारत की बढ़ती भूमिका पर बात की। उनकी प्रस्तुति में तीन पहलुओं को जोड़ा गया: स्थानीय विनिर्माण का मजबूत आधार, इस वर्ष भारत में स्थापित वैश्विक क्षमता केंद्र और खाड़ी देशों के बाजारों में साउथको तथा दर्शना की मौजूदगी।
साउथको इंडिया के कंट्री हेड प्रकाश टी. जॉन और महाप्रबंधक, व्यवसाय विकास, वीरेश मनराय भी मीडिया संवाद में शामिल हुए।
मेहलर के लिए भारत का यह अध्याय साउथको में उनके अपने कार्यकाल से जुड़ा है। उन्होंने १९९० में कंपनी से अपने करियर की शुरुआत की। वर्ष २०१६ में अध्यक्ष बनने से पहले उन्होंने यूरोप, एशिया प्रशांत और अमेरिकी क्षेत्र में साउथको के कारोबार का नेतृत्व किया। एशिया प्रशांत क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने साउथको इंडिया की शुरुआत की देखरेख भी की थी। इसलिए पुणे की उनकी यात्रा उस भारतीय कारोबार के विकास पर चर्चा का अवसर बनी, जिसकी स्थापना से वह स्वयं जुड़े रहे हैं।
भारत में साउथको की मौजूदगी कई चरणों में विकसित हुई है। कंपनी ने २००५ में देश में पहला कदम रखा और २००८ में पुणे में क्षेत्रीय मुख्यालय तथा विनिर्माण इकाई स्थापित की।
इसके बाद रांजणगांव इकाई के विस्तार से उत्पादन और वितरण के लिए जगह बढ़ी। वर्ष २०२२ में साउथको ने पुणे की दर्शना इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण किया। दर्शना भारत में एक्सेस हार्डवेयर की प्रमुख निर्माता और आपूर्तिकर्ता है। इस अधिग्रहण से साउथको की स्थानीय विनिर्माण मौजूदगी बढ़ी और भारतीय उपकरण निर्माताओं को भारत में डिजाइन, इंजीनियर और निर्मित समाधान उपलब्ध कराने की उसकी क्षमता मजबूत हुई।
दोनों व्यवसायों के बीच यही संबंध साउथको की मेक इन इंडिया रणनीति का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। दर्शना अपने साथ भारत में स्थापित ब्रांड और विनिर्माण आधार लाई, जबकि साउथको के व्यापक उत्पाद पोर्टफोलियो और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ने संयुक्त व्यवसाय को बड़ा आधार दिया। कंपनी ने इस संयोजन को भारत और अन्य बाजारों के ग्राहकों के लिए स्थानीय क्षमताएं बढ़ाने की नींव बताया।
“पुणे साउथको के वैश्विक नेटवर्क का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। भारत स्थित हमारी टीम ने जो विशेषज्ञता विकसित की है और जिस तरह वह इंजीनियरिंग, विनिर्माण तथा ग्राहकों की जरूरतों की समझ को एक साथ लाती है, उस पर मुझे गर्व है,” मेहलर ने कहा।
प्रस्तुति में भारत की भूमिका का एक नया पहलू भी सामने आया। साउथको ने अन्य बाजारों में अपनी टीमों को सहयोग देने के लिए २०२६ में भारत में वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित किया है।
कंपनी ने बताया कि इस पहल के तहत उसकी वैश्विक इंजीनियरिंग सेवाएं भारत स्थानांतरित की जा रही हैं। इस केंद्र में कारोबार और प्रौद्योगिकी से जुड़े अन्य कार्य भी शामिल हैं। इस तरह भारत में कार्यरत टीमों की जिम्मेदारियां केवल घरेलू ग्राहकों की सेवा तक सीमित नहीं रहतीं।
इससे साउथको इंडिया के कार्यक्षेत्र का विस्तार होता है। पुणे क्षेत्र में उत्पादन, इंजीनियरिंग, परीक्षण और ग्राहक सहायता की क्षमताएं पहले से मौजूद हैं। नया क्षमता केंद्र भारत की टीम को दुनिया के अन्य हिस्सों में कार्यरत साउथको की टीमों से सीधे जोड़ता है। मेहलर ने इसे कंपनी के विनिर्माण निवेश के साथ रखकर समझाया कि स्थानीय क्षमताएं किस तरह ऐसे कारोबार में योगदान देती हैं, जिसके डिजाइन, उत्पादन और ग्राहक संबंध कई क्षेत्रों में फैले हैं।
कंपनी के उत्पाद यह भी बताते हैं कि स्थानीय समझ क्यों जरूरी है। साउथको लैच, हिंज, लॉक, हैंडल, फास्टनर और इलेक्ट्रॉनिक एक्सेस सिस्टम जैसे हार्डवेयर उपलब्ध कराती है।
प्रस्तुति में दिखाया गया कि कुछ मानक उत्पाद कैटलॉग से सीधे दिए जा सकते हैं, कुछ को खास उपयोग के अनुरूप बदला जाता है और कुछ ग्राहक की आवश्यकता के अनुसार विकसित किए जाते हैं। वाहन के अंदरूनी हिस्सों से लेकर निर्माण मशीनों और सार्वजनिक परिवहन तक, हर पुर्जे को उस उपकरण और उसके उपयोग के तरीके के अनुरूप होना पड़ता है। इसी कारण ग्राहक और स्थानीय टीम के बीच संवाद इंजीनियरिंग प्रक्रिया का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनता है।
साउथको ने ऑटोमोटिव, निर्माण तथा अन्य भारी मशीनों और सार्वजनिक परिवहन को अपने मौजूदा प्रमुख बाजारों के रूप में रखा। प्रस्तुति में रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और एंटरप्राइज हार्डवेयर को ध्यान देने वाले क्षेत्रों के रूप में भी पहचाना गया। इन उपयोगों की विविधता बताती है कि कंपनी अपनी एक्सेस हार्डवेयर विशेषज्ञता और स्थानीय जरूरतों को समझकर किए जाने वाले उत्पाद विकास के लिए कहां अवसर देखती है। यह उत्पादों की चर्चा को भारत में इंजीनियरिंग और ग्राहक की समझ को करीब लाने की रणनीति से भी जोड़ती है।
दर्शना के जरिये भारत साउथको की क्षेत्रीय बाजार रणनीति से भी जुड़ता है। दोनों ब्रांडों ने संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब सहित खाड़ी देशों के ग्राहकों तक अपनी पहुंच की जानकारी दी। इस प्रयास में साउथको के वैश्विक उत्पादों के साथ भारत में विकसित दर्शना ब्रांड भी शामिल है। प्रस्तुति में मध्य पूर्व को इस संयुक्त पेशकश के लिए एक बाजार और भारत की क्षमताओं को देश के बाहर के ग्राहकों तक पहुंचाने का एक मार्ग बताया गया।
कंट्री हेड के रूप में प्रकाश टी. जॉन भारत के कारोबार की रणनीतिक दिशा में भूमिका निभाते हैं। इसमें बाजार विकास और मेक इन इंडिया से जुड़े फैसले शामिल हैं। व्यवसाय विकास के माध्यम से वीरेश मनराय ग्राहकों और अलग-अलग उपकरणों के उपयोग की जरूरतों को सामने लाते हैं। मेहलर के साथ उनकी उपस्थिति ने चर्चा के दो पहलुओं को जोड़ा: कंपनी किन क्षमताओं को आगे बढ़ाना चाहती है और उपकरण निर्माताओं को उन क्षमताओं से क्या चाहिए।
पुणे में साउथको की मौजूदगी अब भारतीय ग्राहकों के लिए किए जाने वाले काम को दुनिया भर की टीमों के लिए इंजीनियरिंग सेवाओं और भारत से बाहर के बाजारों में कंपनी की गतिविधियों से जोड़ती है।
मेहलर की यात्रा ने इन विकासों को एक साझा संदर्भ दिया और इन्हें आगे बढ़ाने वाले लोगों को चर्चा के केंद्र में रखा।
साउथको के बारे में:
साउथको इंक. दुनिया भर के उपकरण निर्माताओं के लिए इंजीनियर्ड एक्सेस समाधान डिजाइन और निर्मित करती है। इसके उत्पादों में मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक लैच, हिंज, फास्टनर, हैंडल और पोजिशनिंग उत्पाद शामिल हैं। इनका उपयोग परिवहन, औद्योगिक उपकरणों, चिकित्सा उपकरणों और अन्य क्षेत्रों में होता है। टचपॉइंट समूह की कंपनी साउथको का कारोबार अमेरिकी क्षेत्र, यूरोप और एशिया प्रशांत में फैला है। भारत में उसकी स्थापित विनिर्माण और इंजीनियरिंग मौजूदगी है।