February 15, 2026

आईसीएमएआई का देश के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान – रजनीश जैन

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“RISE इंडिया लीडरशिप समिट 2026” संपन्न

पुणे: कुछ वर्ष पहले तक कॉस्ट अकाउंटेंट्स का कार्य मुख्यतः कंपनियों का वित्तीय ऑडिट करने और फाइनेंशियल अकाउंटिंग तक सीमित था। इसलिए इस पेशे को कंपनियों के बैक ऑफिस कार्य के रूप में देखा जाता था। लेकिन बदलते समय के साथ दि इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICMAI) के प्रयासों से इस क्षेत्र का दायरा और महत्व काफी बढ़ गया है। आज देश के लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और ICMAI के माध्यम से देश की आर्थिक गतिविधियों में लगभग 50,000 करोड़ रुपये का योगदान संभव हो पाया है। इसलिए देश के आर्थिक सशक्तिकरण में ICMAI की बड़ी भूमिका है और “विकसित भारत” के निर्माण में संस्थान का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा, ऐसा प्रतिपादन रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन एवं चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर रजनीश जैन ने किया।

वे पुणे में दि इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICMAI) द्वारा आयोजित “RISE इंडिया लीडरशिप समिट” के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर पर ICMAI की करियर काउंसलिंग एवं प्लेसमेंट कमेटी के अध्यक्ष CMA विनय रंजन, ICMAI के उपाध्यक्ष नीरज जोशी, पूर्व अध्यक्ष बी. बी. नायक, CMA चैतन्य मोहरीर (सचिव – ICMAI-WIRC), CMA श्रीकांत इप्पलपल्ली (अध्यक्ष – ICMAI पुणे चैप्टर) सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

रजनीश जैन ने कहा कि ICMAI का स्वरूप, कार्य और जिम्मेदारियां समय के साथ निरंतर बदल रही हैं। आज कॉस्ट अकाउंटेंट्स की भागीदारी कंपनियों की निर्णय प्रक्रिया में बढ़ रही है और ICMAI देश के आर्थिक विकास को सकारात्मक दिशा देने वाली संस्था बन रही है। यदि उद्योग जगत और ICMAI मिलकर कार्य करें तो न केवल कंपनियों का विकास होगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

CMA श्रीकांत इप्पलपल्ली ने कहा कि तकनीक के साथ-साथ कंपनियों और पेशेवरों की आवश्यकताएं तेजी से बदल रही हैं। आज देश में कॉस्ट अकाउंटेंट्स की कमी महसूस की जा रही है और व्यवसायों की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस प्रकार की अधिक सम्मेलनों की आवश्यकता है।

CMA विनय रंजन ने बताया कि कुछ वर्ष पहले तक भारत की पहचान पश्चिमी देशों की कंपनियों के लिए बैक ऑफिस सेवाएं प्रदान करने वाले देश के रूप में थी। लेकिन अब यह छवि बदल रही है और आज ICMAI एवं कॉस्ट अकाउंटेंट्स का देश की आर्थिक गतिविधियों में लगभग दो प्रतिशत योगदान है। ICMAI के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो रहा है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में संस्थान की अहम भूमिका होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।

बी. बी. नायक ने कहा कि ICMAI का मुख्य उद्देश्य केवल व्यवसाय वृद्धि ही नहीं, बल्कि कंपनियों और पेशेवरों में गुणात्मक परिवर्तन लाना भी है। उन्होंने युवाओं और कॉस्ट अकाउंटेंट्स से आग्रह किया कि वे रिलायंस जियो में रजनीश जैन द्वारा किए गए सकारात्मक बदलावों को प्रेरणा के रूप में अपनाएं।

नीरज जोशी ने स्पष्ट किया कि समय के अनुरूप पाठ्यक्रमों में लगातार सुधार किया जा रहा है और गुणवत्तापूर्ण कॉस्ट अकाउंटेंट्स तैयार करना आज की आवश्यकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ICMAI नए और भविष्य-उन्मुख पाठ्यक्रम विकसित कर रहा है।

कार्यक्रम का संचालन रिया चौधरी ने किया। CMA श्रीकांत इप्पलपल्ली ने प्रास्ताविक भाषण दिया, जबकि CMA चैतन्य मोहरीर ने आभार प्रदर्शन किया।

उद्घाटन के बाद आयोजित कॉस्ट अकाउंटिंग विषयक परिचर्चा में चित्तरंजन चट्टोपाध्याय, राजेश शुक्ला, राजा मुखर्जी, संजय भार्गव, हिमांशु दवे, अरिंदम दत्ता, एस. के. गुप्ता, पूजा शेलके, रजनीश पांडे, डी. वी. जोशी, अजय महाजन, दिनेश कुमार वर्मा, हितेश माहेश्वरी, अवधूत उपाध्ये, मिलिंद जोगळेकर और अमित आप्टे सहित अनेक विशेषज्ञों ने “ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में रणनीतिक नेतृत्व: मूल्य सृजन के शिल्पकार के रूप में CMAs” विषय पर मार्गदर्शन किया।

इस समिट के माध्यम से GCCs की बदलती भूमिका और कॉस्ट एवं मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स (CMAs) के बढ़ते रणनीतिक योगदान को रेखांकित किया गया। सम्मेलन में विभिन्न अग्रणी GCC कंपनियों के प्रतिनिधि, CFOs तथा HR प्रमुख बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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