हर्षवर्धन सदगीर दूसरी बार बने महाराष्ट्र केसरी
रामकृष्ण अण्णा सातव पाटील के नेतृत्व में 68वीं महाराष्ट्र केसरी कुश्ती स्पर्धा का भव्य समापन; महेंद्र गायकवाड उपविजेता
वाघोली, पुणे : 68वीं वरिष्ठ महाराष्ट्र राज्य अजिंक्यपद एवं महाराष्ट्र केसरी कुश्ती स्पर्धा का भव्य समापन वाघोली में उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। इस प्रतिष्ठित स्पर्धा में नाशिक के हर्षवर्धन सदगीर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरी बार महाराष्ट्र केसरी का मानाचा किताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने सोलापुर जिल्हा के महेंद्र गायकवाड को पराजित किया, जबकि महेंद्र गायकवाड उपविजेता रहे।
रामकृष्ण अण्णा सातव पाटील के नेतृत्व और नियोजन में आयोजित इस स्पर्धा को राज्यभर के कुश्तीप्रेमियों का उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला। समापन समारोह में राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक, औद्योगिक और क्रीडा क्षेत्र के अनेक मान्यवर उपस्थित रहे, जिससे आयोजन की भव्यता और प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ गई।
फाइनल तक पहुंचने का सफर भी बेहद रोमांचक रहा। माटी विभाग में सोलापुर जिल्हा के महेंद्र गायकवाड ने हिंगोली के सिकंदर शेख को 3-0 से हराकर अंतिम फेरी में प्रवेश किया। वहीं गादी विभाग में नाशिक के अनुभवी हर्षवर्धन सदगीर ने जय पाटील पर पूरी तरह वर्चस्व कायम करते हुए केवल ढाई मिनट में 10-0 के तकनीकी गुणों के आधार पर जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई।
विशेष बात यह रही कि हर्षवर्धन सदगीर और महेंद्र गायकवाड दोनों ही अर्जुन पुरस्कार विजेता काका पवार की परंपरा में तैयार हुए पहलवान हैं और एक ही अखाड़े की साधना से जुड़े हैं। इसी वजह से महाराष्ट्र केसरी की अंतिम कुश्ती को लेकर दर्शकों में खास उत्सुकता थी।
फाइनल मुकाबले की शुरुआत महेंद्र गायकवाड के आक्रमक खेल से हुई और उन्होंने शुरुआती बढ़त भी हासिल की। लेकिन हर्षवर्धन सदगीर ने संयम, अनुभव और रणनीति का परिचय देते हुए मुकाबले में शानदार वापसी की। पहले चरण के अंत तक दोनों पहलवान 1-1 की बराबरी पर थे। दूसरे चरण में सदगीर ने निर्णायक क्षणों में महत्वपूर्ण गुण बटोरे और अंततः 4-3 से जीत दर्ज करते हुए दूसरी बार महाराष्ट्र केसरी का किताब अपने नाम कर लिया।
पारितोषिक वितरण समारोह में बोलते हुए आयोजक रामकृष्ण अण्णा सातव पाटील ने कहा कि केवल 37 दिनों के भीतर इस भव्य स्पर्धा का आयोजन करना एक बड़ा आव्हान था, जो वाघोली ग्रामस्थों के सहयोग से संभव हो सका। उन्होंने कहा कि आयोजन का उद्देश्य केवल विजेता पहलवानों को भरघोस पारितोषिक देना नहीं, बल्कि कुश्ती को पारंपरिक ग्रामीण चौकटी से बाहर निकालकर शहरी पटल पर प्रतिष्ठित करना भी है। साथ ही उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र से भी कुश्ती को अधिक समर्थन देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शिक्षणमंत्री दादा भुसे ने कहा कि बच्चों में छोटी उम्र से ही खेलों के प्रति रुचि और संस्कार विकसित करने के लिए विशेष क्रीडा शाळाएं शुरू की जाएंगी। उन्होंने आयोजन की प्रशंसा करते हुए रामकृष्ण अण्णा सातव पाटील के नियोजन की सराहना की।
विधायक ज्ञानेश्वर ऊर्फ माऊली आबा कटके ने कहा कि महाराष्ट्र में अब तक किसानों के बेटों ने ही कुश्ती में बड़े मुकाम हासिल किए हैं। उन्होंने लोणीकंद में बालेवाडी और डोणजे की तर्ज पर आधुनिक, उच्च तकनीकयुक्त क्रीडांगण विकसित करने की आवश्यकता व्यक्त की।
कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे ने भी आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस स्पर्धा के लिए जो भव्य मैदान तैयार किया गया है, उसी भूमि से भविष्य के ऑलिम्पियन तैयार हो सकते हैं। उन्होंने पहलवानों को आश्वासन दिया कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी रहेगी और हरसंभव मदद देगी।
पारितोषिक वितरण समारोह में कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे, शिक्षणमंत्री दादा भुसे, भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह, आयोजक रामकृष्ण सातव, महाराष्ट्र राज्य कुस्तीगीर संघ के अध्यक्ष रामदास तडस, कार्याध्यक्ष संदीप भोंडवे, सरचिटणीस योगेश दोडके, भाजपा युवा मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष कृष्णराज महाडिक तथा कुश्ती पंच प्रमुख दिनेश गुंड सहित अनेक मान्यवर उपस्थित थे।
स्पर्धा के अंतिम दिन उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आयोजक रामकृष्ण अण्णा सातव पाटील, विधायक विजय बापू शिवतारे, विधायक ज्ञानेश्वर ऊर्फ माऊली आबा कटके, सांसद अमोल कोल्हे, विधायक अमित गोरखे, भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष कृष्णराज महाडिक, विधायक राहुलदादा कुल, शहराध्यक्ष नाना भानगिरे, केंद्रीय राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोळ, महापौर रवि लांडगे, विधायक बापूसाहेब पठारे, विधायक महेशदादा लांडगे, विधायक अण्णा बनसोडे, विधायक योगेश टिळेकर, विधायक भीमराव अण्णा तापकीर, माजी विधायक जगदीश मुळीक, माजी विधायक सुनील टिंगरे, विधायक सुनील शेळके, छत्रपती संभाजीराजे भोसले, मंत्री दादा भुसे, अभिनेता जॅकी श्रॉफ, पीसीएमसी आयुक्त विजय सूर्यवंशी, पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार, पुणे महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम तथा महापौर मंजुषा नागपुरे सहित अनेक क्षेत्रांतील मान्यवर उपस्थित रहे।
वाघोली में तैयार की गई भव्य क्रीडानगरी में संपन्न यह स्पर्धा केवल एक खेल प्रतियोगिता भर नहीं रही, बल्कि महाराष्ट्र की समृद्ध कुश्ती परंपरा का उत्सव बन गई। राज्यभर से आए पहलवानों ने अपने कौशल्य की छाप छोड़ी, जबकि हजारों कुश्तीप्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। सुव्यवस्थित, शिस्तबद्ध और भव्य नियोजन के कारण रामकृष्ण अण्णा सातव पाटील और उनकी पूरी टीम की सर्वत्र सराहना हुई।
68वीं महाराष्ट्र केसरी कुश्ती स्पर्धा का यह सफल समापन न केवल आयोजन की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने महाराष्ट्र केसरी जैसी प्रतिष्ठित स्पर्धा की गरिमा को और ऊंचाई दी।
