बॅरिस्टर विठ्ठलराव गाडगील स्कूल में रोग प्रतिरोधक सत्र का आयोजन
पुणे – 05 अगस्त 2025 – भारत में लोग मानसून का सबसे अधिक बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि यह तीखी गर्मी से राहत देता है और मन को तरोताजा करता है। हालांकि, इस ताजगी देने वाले मौसम के साथ-साथ यह कई प्रकार की बीमारियों को भी आमंत्रित करता है। यदि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो, तो हम आसानी से बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं, खासकर बच्चे इससे अधिक प्रभावित होते हैं। तापमान में गिरावट और नमी में वृद्धि के कारण मानसून के दौरान संक्रमण होना आम बात है।
आमतौर पर मानसून में सर्दी-खांसी, मलेरिया, डेंगू, टाइफॉइड और निमोनिया जैसी बीमारियाँ बढ़ जाती हैं। गर्म और नम वातावरण के कारण विभिन्न प्रकार के संक्रमण फैलते हैं और यदि प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो, तो ये तेजी से फैलते हैं। डाबर च्यवनप्राश की पहल के तहत हाल ही में बैरिस्टर विठ्ठलराव गाडगील स्कूल में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डाबर इंडिया लिमिटेड के दिनेश कुमार, प्रभारी मुख्याध्यापिका सौ. सुनीता जाधव, श्री नितीन वाणी, सौ. संजीवनी सोनार, श्री प्रदीप गवळी, श्रीमती स्वाती लोहकरे, सौ. सुरेखा डफळ, सेविका सौ. पूजा घोगरे, अजय कोंढावळे, तुषार तमनर, रोहित सिरस्वाल, कल्याणी गाडे और स्कूल क्रमांक 118 विश्रांतवाडी के सभी कर्मचारी और शिक्षक उपस्थित थे।
शताब्दियों से प्रचलित आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली पर आधारित सही मात्रा में ली गई औषधियाँ मानसून के रोगाणुओं से लड़ने में सहायक होती हैं। एलोपैथी प्रणाली जहाँ रोगों के उपचार पर केंद्रित है, वहीं भारतीय पारंपरिक औषधियाँ और आयुर्वेद जीवनशैली को अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान बनाने में मदद करते हैं।
‘रसायन तंत्र’ आयुर्वेद की आठ शाखाओं में से एक है, जिसमें नवचेतना देने वाले उपायों, आहार नियमों और स्वास्थ्यवर्धक आदतों का वर्णन है। प्रतिदिन दो चम्मच डाबर च्यवनप्राश लेना, अपने आहार में ‘रसायन तंत्र’ को शामिल करने का एक उत्तम तरीका है।
डॉ. परमेश्वर अरोरा (एम.डी., आयुर्वेद, बी.एच.यू.) ने बताया कि, “च्यवनप्राश एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक सूत्र है, जिसका उपयोग दशकों से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और संक्रमण से बचाव के लिए किया जाता रहा है। डाबर च्यवनप्राश इसी पारंपरिक सूत्र पर आधारित है, जिसमें कई औषधीय वनस्पतियाँ और खनिज तत्व शामिल हैं। यह विभिन्न बीमारियों की रोकथाम में उपयोगी साबित हुआ है, क्योंकि इसके रोग प्रतिरोधक गुण सिद्ध हो चुके हैं। डाबर ने कई क्लिनिकल और प्री-क्लिनिकल अध्ययन किए हैं, जो दिखाते हैं कि यह प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, मौसमी प्रभाव, नाक की एलर्जी और संक्रमण में प्रभावी है। च्यवनप्राश ‘वात-पित्त-कफ’ इन त्रिदोषों को संतुलित करने में भी मदद करता है। डाबर च्यवनप्राश डेंड्राइटिक सेल्स, एन.के. सेल्स और मैक्रोफेज जैसे संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं को सक्रिय करने में मदद करता है।”
डाबर इंडिया लिमिटेड में हेल्थ सप्लिमेंट्स के मार्केटिंग हेड श्री प्रशांत अग्रवाल ने कहा, “आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा और प्रकृति के ज्ञान के साथ डाबर ने हमेशा शोध-आधारित, सुरक्षित, सुलभ और प्रभावी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने पर बल दिया है। हम अपने उत्पादों के माध्यम से भारत में विभिन्न बीमारियों से लड़ने का प्रयास कर रहे हैं। भारत में लोग प्राकृतिक गुणों के कारण वनस्पतियों और हर्बल अर्क को अधिक पसंद करते हैं। डाबर च्यवनप्राश प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के तकनीकी संयोजन का परिणाम है। यह प्रतिदिन होने वाले संक्रमणों से सुरक्षा के लिए एक आदर्श उपाय है।”
डाबर च्यवनप्राश का प्रमुख घटक ‘आंवला’ है, जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के गुणों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा इसमें गिलोय (गुडुची), पिप्पली, कांटाकरी, काकडशिंगी, भूम्यामलकी, वासा, पुष्करमूल, प्रिष्णीपर्णी, शालपर्णी जैसे तत्व शामिल हैं, जो सामान्य संक्रमणों और श्वसन से संबंधित एलर्जी को कम करने में मदद करते हैं। इस प्रकार, च्यवनप्राश अनेक औषधीय वनस्पतियों का संतुलित मिश्रण है, जो विशेष रूप से मानसून के दिनों में शरीर को बेहतर प्रतिरोधक क्षमता प्रदान कर स्वस्थ बनाए रखता है।
